29 Aug, 2007

अहांक साथ

अहांक साथ बिताउल दिन
कतेक छोट होयत छल
तखन दुनिया
कतेक नीक लागैत छल.
आमक, लतामक गाछी
गेहुंक, मटरक लहराइत खेत
जतय बितय छल
अपन प्यारक स्वर्णिम क्षण.
अहांक रुसिकय
कुसियारक खेत में छुपि जनाय
हमर बेचैनी अहांक खोजनाय.
मिलला पर ज़ोर हंसिकय भागनाय
दम फुलला पर दुनु गोटा के
कंहा पर हाथ हाफनाय
अहांके भरि पांज चिपैट नाचनाय
, एहिठाम बस मे लोकक चिपटनाय
कतेक फर्क अछि
हम एतय आबि गेलहुं
मुदा हमर मन...हमर हंसि
हमर सभ किछु ओतय रहि गेल
अहिं के पास..
एतय दिन कतेक पैघ लगैत अछि
काटलो नहि कटैत
ओतय खेतक एकांतो मे अहांक संग छल
एतय लाखक भीड़ मे एकसरे
अहां एकरा केना सहैत होएब...

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