30 Dec, 2007

कटिहार जोगबनी बड़ी लाइन

नया साल सं कटिहार आओर जोगबनी के बीच बड़ी लाइन बिछाबय के काज शुरू होयत. इलाका के लोकक लेल ई नबका साल सही मायने में किछ नब साबित होयत. छोटी लाइन के बड़ी लाइन में बदलय के तारीख तय क देल गेल छै. एक तारीख सं काज शुरू भ जायत. अधिकारी गण सभके कहनाय छैन जे मार्च के अंत तक काज पूरा भ जायत. तखन तक यानी तीन मास तक कटिहार सं जोगबनी के बीच जे अखन तक छोटी लाइन छल ओ बंद रहत. एकरा बदलय के काज होयत. एहि सं एतय के लोक सभ के अखन कनि परेशानी त जरूर होयत... मुदा जखन मार्च के बाद काज पूरा भय जायत त सुविधा सेहो खुब मिलत. आब एहि ठाम सं सीधा दिल्ली... मुम्बई... कोलकाता जा सकय छी... कोनो ठाम गाड़ी बदलय के झंझट नहिं.
कटिहार सं जोगबनी के बीच जे अखन जे छोटी लाइन अछि... ओहि पर पटरी बिछाबय के काज 1878 में शुरू भेल छल आओर 1887 सं एहि पर ट्रेन चलनाय शुरू भेल. आब एहिठाम 120 साल बाद फेर सं विकासक बयार चलत. कहि सकय छी जे आजादी के बाद मिथिलांचल के विकास पर जे ध्यान देबाक चाहि छल ओ नहिं देल गेल. अखनो अपन इलाका देश के दोसर इलाका सं काफी पिछड़ल अछि.
नया साल सं जे पटरी बदलय के काज शुरू होयत ओ गुवाहाटी रेंज के मुख्य अभियंता के देखरेख में भ रहल अछि. आओर मार्च के आखिर में जखन काज पूरा भ जायत त सुरक्षा अधिकारी एकर जांच करताह. जांच में सब किछ ठीक निकलला पर ओ सुरक्षा संबंधी प्रमाण पत्र देथिन्ह जे एहि रुट पर गाड़ी के परिचालन कएल जा सकय अ. तखने गाड़ी चलत. भ सकय अ सुरक्षा कारणे...जांच आदि में किछ आओर टाइम लगि जाय. चलु किछ टाइम लगय मुदा एकटा बड़का काज होबय जा रहल अछि.

12 Dec, 2007

केहन स्कूल में हो एडमिशन?

आई काल्हि दिल्ली नोएडा में बच्चा सभक नाम लिखाबय लेल मारा मारी चलि रहल अछि. गार्जियन सभ परेशान. एकटा नहिं कए-कएटा स्कूल में फॉर्म भरबा रहल छथिन्ह. जोगार बैसा रहल छथिन्ह. केहुना नुनु-बुच्ची के नाम नीक स्कूल में लिखा जाय. एक बेर नाम लिखा गेल... एडमिशन भ गेल त फेर 12वीं तक निश्चिंत. मुदा एकटा बात सोचय वाला ई अछि कि एडमिशन केहन स्कूल में करायल जाय... तरक भड़क वाला में... हाई-फाई में जतय बच्चा जाकS डिप्रेशन के शिकार भ जाय. बच्चा के लेल घर आ स्कूलक बीच तालमेल- सामंजस्य बनानाय मुश्किल भ जाय. काल्हिए गुड़गांव में एकटा स्कूल में बच्चा सभक बीच गोली सेहो चलल. ऐना में कि करय जाय???
हमरा अपन नुनु के नाम सेहो लिखयबाक रहय. स्कूल में पूछल गेल अहां एहिठाम किएक एडमिशन कराबय चाहय छी. हम जे हुनका जवाब देलयन्हि तकर किछ शब्द हम अहां सभ के सेहो बताबय चाहय छी. हम हुनका कहलयन्हि जे हम शुरूए सं चाहैत छलहुं जे एहन स्कूल में दाखिला करायब जतय तनाव मुक्त वातावरण में बच्चा के जीवन के पाठ पढायल जाएत होय. पढ़ाई के वातावरण बच्चा के अनुकूल होय. जतय ओकर अपन खुद क व्यक्तित्व के विकास होय. किएक त हर व्यक्ति एक दोसरा सं अलग होयत अछि... सोच अलग होयत अछि... समझि अलग होयत अछि... लक्ष्य अलग होयत अछि... काज करय के तरीका अलग होयत अछि... प्रतिभा आओर प्रकृति अलग होयत अछि... एके क्लॉस में पढई वाला घिया-पुता में सं कोई चंचल होयत अछि... कोई सीधा साधा... कोई शरारती... त कोई ढीला-ढाला. कोई डॉक्टर बनय चाहय अ त कोई इंजीनियर... त कोई पायलट... गायक... रिपोर्टर त कोई वैज्ञानिक... त ककरो में नेता बनय के खूबी होयत अछि. त फेर सभ बच्चा के संग एकहि तरहक बर्ताव केना होयत... सभ के एकहिं तरहे केना पढा सकय छी... सभ के एकेटा डंडा सं केना हांकि सकय छी... अगर सभ के एकहिं तरह सं लेबय त बच्चा के मन पढ़य में नहिं लगत. वो कुंठित भय जायत. पढाई सं दूर भागय लागत. ऐना में हर बच्चा पर अलग अलग ध्यान देय के जरूरत छै. ऐहन पढ़ाई के जरूरत छै जाहि सं हर बच्चा के अलग अलग अपन व्यक्तित्वके विकास भय सकय. अपन अलग पहचान बनि सकय. ओकर अपन अलग सोच बनि सकय. ओकर अंदर मौजूद प्रतिभा के अलग ढंग सं विकसित कएल जा सकय.
बच्चा के ऐहन मूल्य आधारित शिक्षा मिलय जाहि सं ओकर सोच व्यापक भ सकय... मुदा ऐहन भेलों पर ओ अपन जड़ सं जुड़ल रहय. मुदा एहि के लेल ओकरा ड़ांटय-डपटय के जरूरत नहिं छै. बच्चा त ओ पौधा छै जकरा माली... शिक्षक जेहन आकार देत ओ बनत... मुदा हर पौधा एक दोसर सं अलग होयत अछि. अहां हर पौधा के एक तरहे कांटि-छांटि नहिं सकय छी. हर पौधा के ओकरा अपना अनुरूपे आगां बढय के आजादी देबय पड़य छै. जाहि सं ओकरा में हर वक्त एकटा नब उत्साह... उमंग... ऊर्जा झलकय... ओ पढ़ाई के बोझ नहिं समझय.
एकरा संग एक बात पर आओर ध्यान देबय के जरूरत छै जे स्कूल क शिक्षक के ई बात सेहो बता देल जाय जे ओ बच्चा के संग ऐना पेश अबथिन्ह जाहि सं बच्चा वास्तव में जीवन जीए के कला सीख सकय. ओ आधुनिक और आध्यात्मिक दुनु तरहक शिक्षा पाबि सकय. खुद के पहचानि सकय... दुनिया के खुबसूरती... सुन्दरता के महसूस कए सकय ... ओकर आनंद उठा सकय... अपन प्रकृति के अनुसार विकास कए प्रकृति सं जुड़ि सकय. भ सकय छै बच्चा जे सवाल शिक्षक सं पूछि रहल छै वो टीचर के समझि में नहिं आबि रहल होय. ओ बात खुद टीचर के समझ सं ऊपर के होय... किएक त हर चीज हर आदमी के आबय ई त नहिं भ सकय अ. ऐहन में टीचर के बच्चा के उल्टा-पुल्टा समझा के शांत नहिं करबाय चाहि... ऐहन में शिक्षक के चाहि जे ओ बच्चा के अनुसार सोचि जवाब तलाशताह... ऐना में टीचर के प्यार सं समझयबाक चाहि... दोसर दिन विस्तार सं बतयबाक बात करय चाहि. मुदा एक बात ध्यान रहय ई वादा टूटबाक नहिं चाहि. आओर जोर जबरदस्ती सं अपन बात मनयबाक नहिं चाहि. टीचर के ई नहिं चाहि कि बच्चा पर अपन राय थोपि ओकरा अपना जकां बना दी. ओकरा पर अपन राय नहिं थोपी... बच्चा के अपन राय विकसित करय में मदद करबाक चाहि.
खोज बीन करू एहि में सं ज्यादा गुण जेहि स्कूल... जेहि टीचर में मिलय ओतय पढ़ाऊ... हमरा त ऐहन दुटा स्कूल मिलय एकटा आईआईटी के पास आरविंदो आश्रम में मीराम्बिका आओर दोसर नोएडा में श्री श्री रविशंकर विद्यामंदिर (SSRVM). मीराम्बिका दूर छल ताहि लेल नोएडा वाला में नाम लिखा देलअहिं... एहि विषय पर अहां सभ अपन राय जरूर देब.

10 Dec, 2007

विज्ञान सं रुझान कम किएक ?

एकटा पेपर निकलय छै गौड़संस टाइम्स. एहि में एकटा संगी काज करय छथिन्ह प्रीति पाण्डेय. हुनका एकटा परिचर्चा के लेल हमर विचारक जरूरत छलन्हि. विषय छल विज्ञान विषय के प्रति लोकक रुझान किएक घटि रहल छै ? हम जे हुनका अपन विचार देलयन्हि से एहिठाम अहां सभ के सेहो बता रहल छी.
हमरा विचारे त आई काल्हि जे जॉब के ट्रेंड छै ओहि में आईटी... बीपीओ... केपीओ... मैनेजमेंट... रिटेल... हेल्थ... फाइनेंस...बैंकिंग आओर मीडिया बढ़त बनौने अछि. एहि में विज्ञान अपना के काफी पाछा पाबैत अछि. आजुक युवा ट्रेंडक हिसाब सं चलय के चाहैत अछि. चाहे ओ फैशन होय... ऑटो होय... खाना पीना होय या सोशल नेटवर्किंग सं जुड़य के बात. एहि सभक पाछा कोनो लेटेस्ट ट्रेंड होय त बात बनैत अछि... आओर ईहे चीज जॉब में सेहो छै. एहि में विज्ञान कतोउ नहि ठहरैत अछि. 15-20 साल पहिने जखन जॉब के लेल ज्यादा ऑप्शन नहि छल तखन लड़का सभ हाई स्कूल पास कएला के बाद मेडिकल... इंजीनियरिंगक तैयारी में जुटि जाय छलाह. ओहि समय एकरा अलावा...स्टॉफ सलेक्शन आओर बैंकिंग टा में जायके रास्ता बचैत छलन्हि. आओर एहुं में नहिं भेला पर स्कूल में मास्टरी करैत छलाह. मुदा आई त आप्शनक आओर ऑफरक भरमार छैं. नज़र उठाकS देखिऔ चारु कात ऑप्शने-ऑप्शन नजर आएत. हाथ बढाउ आओर पकड़ि लिअ. संगहि ट्रेंड जिम्हर होएत पैसा सेहो ओम्हरे मिलत. आओर जखन पाई बोलय छै सभ शांत भ जाअ छै. फेर ट्रेंड जुड़ल होय छै बाजार सं...आओर बाजार जकरा पाछा भागत. पैसा ओकरा पाछा भागत. एहि कारण आई काल्हि करियर पर बाजारक ... लेटेस्ट ट्रेंडक गहरा असर पडि़ रहल अछि. संगहि साइंस में वो एट्रेक्शन... ग्लैमर... पैसा नहिं अछि जे आई के युवा लोकनि के चाहि. एकरा संग ओ किछ अलग हटि कए सेहो करय चाहैत छथिन्ह. फैशन... टीवी... फिल्म... संगीत... मॉडर्न आर्ट सं जुड़य चाहय छथिन्ह. आजुक दिन हिनका लोकनिक लेटेस्ट मंत्र छनि ... खूब कमाउ... खूब उड़ाउ...जमिकS कमाउ... आओर जमिकS मस्ती करु. ई सभ ट्रेंड सेहो बाजारक देन छै.
विज्ञानक प्रति रुझान कम होनाय बाजार के ट्रेंड से त जुड़ले अछि... इंफ्रास्ट्रक्चर सेहो बड़का कारण अछि... आई देशक कोनो सरकारी स्कूल में चलि जाउ ढंग के लैब त छोडु... विज्ञान पढ़ाबय लायक योग्य शिक्षक नहिं मिलत...जे विद्यार्थी मे विज्ञानक रुचि जागृत कय सकथिन्ह. विज्ञान के आसपास के माहौल .. पर्यावरण... परिस्थिति सं जोडि कय समझा सकथिन्ह. विद्यार्थी के पूरा के पूरा विषय भारी लागैत छै एकरा संग टीचर के ट्यूशन सं फुर्सत मिलय तखन नै. ई हाल सरकारी स्कूले टा के नहिं अछि. दु चारि टा के छोड़ि बेसिगर निजी स्कूलों के सेहो ईहे हाल छनि. एक त सुविधा नहि... दोसर पढ़ाबय वाला नहीं. फेर नंबर के त पुछबे नहि करुं.
जखन मार्क्स मिलबे नहि करत त किएल लेल जाय साइंस. जखन कि आर्ट्स...कॉमर्स वाला के लेल ई बात नहि छै. हुनका पास ढेरों विकल्प छैनि. जिम्हर मन भेल चलि पड़लौंह. कोनो टेंशन नहि.
जहां तक हिंदी बेल्टक बात अछि एतय के लोक पैसा पॉवर के ज्यादा महत्व दैत छथिन्ह...ओ अपन नुनु के... बुचि के लोक सेवा आयोग से बीडीओ... कलक्टर... एसपी बनाबय चाहय छथिन्ह...बेटा आईएएस... आईपीएस बनि गेल फेर कोनो चिंता फिकिर नहिं. कॉलेज खत्म होएतहिं लड़का के तैयारी के लेल दिल्ली भेज दैत छथिन्ह. एलाइड नहि...कोनो स्टेट कमीशनो में सलेक्ट भेलहु कि बात बनि गेल. फेर आर्ट स्कोरिंग सबजेक्ट सेहो अछि. त किएक भागल जाय साइंस के पीछे.
खुदा न खास्ता साइंस पढिओ लेलहु त मेडिकल... इंजीनियरिंग क तैयारी में लागल रहुं. लाखों परीक्षार्थी आओर सीट सौ टा...दु सौ टा. कखन तक चांस लेब. नहि भेल त कतोहुं के नहिं रहलौं. खुब पाई लगाके पढुं मुदा नौकरी के कोनो ठिकाना नहि. तखन एहन पढ़ाई किएक नहिं पढि जेहिं स पढ़ाई खत्म आओर नौकरी हाथ में होय. आईआईएम के लड़का सभ के देखिऔ. पढ़ाई के बीच में लाखों रुपिआ के ऑफर मिलय लागैत छनि. कंप्यूटर... रिटेल... फाइनेंस.. बैंकिंग सं जुड़ल लड़का सभ के बड़ मांग छै. इंडस्ट्री के पास लोकक जबरदस्त कमी छै. लड़का सभ सेहो पढ़ाई के बाद नौकरी के लेल सालों इंतजार नहिं करय चाहय छथिन्ह. आखिर इंतजार करल जाय त किएक ? वो जमाना गेल जखन तेज छात्र के लेल सिर्फ मेडिकल आओर इंजीनियरिंग में जाय के रास्ता होयत छल. ईहे हाल सेना के नौकरी के सेहो छै .लोकक रुचि एम्हरो कम भ रहल छै.

एक बात आओर छै जखन अहां बाजय छिएय कि रुचि कम भ रहल छै त बढाबय के लेल कएल कि जा रहल अछि ??? कि किछ एहन भ रहल अछि जाहि सं लगय कि विज्ञानक प्रति रुझान बढि रहल अछि ??? कि बाजार में एकोटा किताब मातृभाषा में उपलब्ध अछि ??? मातृभाषा त छोडुं ... हिंदी में नहिं मिलत. त फेर किएक पढ़त लोक. टु चारि टा किताब हिन्दी में अछि मुदा ओकर टेक्निकल शब्दक ऐहन अनुवाद जकरा देखि अहां माथा पकड़ि लेब. अहां के लागत जे एहि सं बेहतर त अंग्रेजीए . मुदा ईहे अंग्रेंजी सभसं बडका बाधा अछि.

5 Dec, 2007

काज किछ बढ़ल...

दिल्ली में मिथिला अकादमी बनयबाक काज आगा बढ़ि रहल अछि. अकादमी जल्द स जल्द बनय एकरा लेल अखिल भारतीय मिथिला संघक पदाधिकारीगण चारि तारीख के दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सं भेंट कएलथिन्ह. मुख्यमंत्री सं भेंट में 25 नवंबर के दिल्ली में मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह में उठल मुद्दा पर चर्चा कएल गेल. मुख्यमंत्रीजी ई भरोसा देलथिन्ह जे एहि दिशा में जोर शोर सं काज चलि रहल अछि आ अगला हफ्ता दस दिन में किछ ठोस नतीजा सेहो निकलत. ओ एहि बात पर विशेष जोर देलखिन्ह जे दिल्ली में अहांक मिथिला अकादमी जरूर बनत आओर एहि लेल जे जरूरी कदम होएत ओकरा उठावल जाएत. श्रीमती दीक्षित ईहो कहलथिन्ह जे ओ ललित बाबू के नाम पर सड़कक नाम राखल जाय एहि कोशिश में लागल छथिन्ह. एहि पर अखिल भारतीय मिथिला संघ के महासचिव विजय चन्द्र झा जी हुनका एकटा विकल्प सेहो देलखिन्ह. झा जी हुनका कहलथिन्ह जे सुनहरी बाग रोडक नाम ललित बाबू के नाम पर कएल जा सकय अ. मुख्यमंत्रीजी एहि पर विचार करय ते आश्वासन देलखिन्ह.
ओना त कइटा मुद्दा पर चर्चा भेल मुदा मुख्य मु्द्दा ईहे दुएटा छल...मैथिली अकादमी आओर ललित बाबू के नाम पर सड़कक नाम. मुख्यमंत्री सं भेंट करय वाला लोक में संघ के महासचिव विजय चंद्र झाजी क संग संघक कोषाध्यक्ष ललन झा, सचिव शंभुनाथ मिश्र, शीतल कांत झा आओर नंद कुमार जी शामिल छलाह. ईहो बात भेल जे एहि बारे में किछ ठोस भेला पर जल्दीए संवाददाता सम्मेलन बुलाकए सभ लोकनि के जानकारी देल जाएत. चलु एहि तरहे बीच -बीच में मुख्यमंत्री आओर दोसर मंत्री लोकनि सभ सं भेंट होएत रहत त हुनको पर एक तरहे दबाव बनल रहतन्हि आ काज सेहो जल्दी होएत.