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' इंडिया पोस्ट ' क लोकार्पण

दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंहजीक जन्मशती समारोह में राष्ट्रीय हिंदी मासिक इंडिया पोस्ट क लोकार्पण सेहो भेल. एहि पत्रिका के संपादक छथिन्ह श्री महादेव चौहान जी. वरिष्ठ पत्रकार महादेवजी सं हमर पुरान परिचय अछि. ओ बड़ नीक लोक छथिन्ह आ एहि सं पहिने सहारा समय में छलाह. इंडिया पोस्ट पत्रिका श्री अनिल मिश्र जी निकालि रहल छथिन्ह. अनिल जी छोटकी महारानी के दामाद छथिन्ह... आओर समाजसेवा सं सेहो जुड़ल छथिन्ह. दरभंगा राज परिवार के पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़ योगदान रहल अछि. स्वतंत्रता आंदोलन में लोक के जागृत करय लेल... लोक में शिक्षाक बयार लाबय लेल महाराज 1930 में The Indian Nation आओर 1940 में आर्यावर्त्त शुरू कएने छलाह. बाद में मिथिला मिहिर सेहो शुरू भेल. आब ओहि क्रम में राज परिवारक तरफ सं एकटा कोशिश आओर कएल गेल अछि.
एहि अवसर पर आउटलुक हिंदी के संपादक आलोक मेहता कहबो कएलथिन्ह जे हुनका याद छन्हि जे ओहि समय आर्यावर्त्त आ इंडियन नेशन भने पटना सं निकलय छल मुदा एकर प्रभाव दिल्ली के कोनो पेपर सं कनिओ कम नहिं छल. आ एकर समाज पर... लोक पर असर सेहो खूब छल. हुनकर कहनाय छल जे ओ आशा करय छथिन्ह ई पत्रिका ओहि मकसद ... उद्देश्य के लक आगां बढ़त. श्री मेहता शिक्षा आ स्वतंत्रता आंदोलन में दरभंगा महाराज के योगदान के त याद करबे कएलथिन्ह. कहलथिन्ह आर्यावर्त्त आ इंडियन नेशन समाज में जागृति पैदा करय लेल निकलैत छल. ओ मिथिला में छोट-छोट पुस्तकालय खोलय जाइ के आवश्यकता पर सेहो जोर देलथिन्ह.
केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहायजी महाराज के पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान के चर्चा त करबे कएलथिन्ह इहो कहलथिन्ह जे ओहि राजवंश सं जुड़ल अनिल मिश्र जी ओहि परम्परा के आगां जरूर बढयता. वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रभाष जोशी जी कहलथिन्ह जे दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह जी आजाद भारत के एकमात्र राजा छलाह जिनका संविधान सभा में शामिल होय के मौका मिलल छलन्हि.
एहि जन्मशती समारोह में सहारा इंडिया मीडिया एंड इंटरटेनमेंट के प्रमुख श्री सुमित रॉय, वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रभाष जोशी, आउटलुक के संपादक श्री आलोक मेहता, सुलभ इंटरनेशनल के डॉ बिंदेश्वर पाठक , गायक उदित नारायण आओर हुनकर पत्नी गायिका दीपा नारायण के आर्यावर्त्त शिखर सम्मान सं सम्मानित कएल गेल. समारोह में श्री सुमित रॉय मौजूद नहिं छलाह एहि कारणे हुनका तरफ सं ई सम्मान सहारा इंडिया मीडिया के बिजनेस प्रमुख श्री राकेश खार ग्रहण कएलथिन्ह. जखन कि डॉ बिंदेश्वर पाठक जीक तरफ सं ई सम्मान श्री रामचंद्र झा जी ग्रहण कएलथिन्ह.

महराजधिराज जन्मशती समारोह


दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंहजीक जन्मशती समारोह दिल्ली के इंडिया इस्लामिक सेंटर में मनावल गेल. समारोह में मिथिला... मैथिली समाज... कला... शिक्षा के क्षेत्र में महाराजक योगदान पर चर्चा कएल गेल. समारोह के उद्घाटन केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय कयलाह. एहि अवसर पर समारोह में वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी, आउटलुक हिंदी के संपादक आलोक मेहता, जनता दल (यू) के अध्यक्ष शरद यादव, प्रकांड विद्वान आओर कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ रामकरण शर्माजी सेहो मौजूद छलाह.
केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय स्वतंत्रता आंदोलन आओर पत्रकारिता क्षेत्र में महाराज के योगदान के सराहना कएलथिन्ह. महाराज के योगदान के देखैत ओ हुनकर स्मृति में डाक टिकट जारी करय के मांग सेहो कएलथिन्ह. जखन की श्री शरद यादव कहलथिन्ह जे आजादी सं पहिने आओर आजुक पत्रकारिता में बड़ फर्क आबि गेल अ. महाराज स्वतंत्रताक लड़ाई में स्वतंत्रता सेनानी के खूब मदद कएलथिन्ह. जखन कि हुनका एकर शंका छलन्हि जे मदद कएलाह पर हुनकर राज जा सकय छनि. तखनो ओ पाछा नहिं हटलाह.
डॉ रामकरण शर्माजीक कहलाय छलन्हि जे दरभंगा एकमात्र एहन राज छल जे विद्या सं अर्जित कएल गेल छल. दरभंगा राज सम्राट अकबर पंडित महेश झा जी के हुनकर विद्वता सं प्रभावित भ क देने रहथिन्ह. पूर्व कुलपति एहि बात पर दुखी छलाह जे आई काल्हि विश्वविद्यालय के नाम बदलई के बात बीच बीच में सेहो उठैत रहय छै. समारोह के इंडिया इस्लामिक सेंटर के सचिव वशी अहमद नोमानी सेहो संबोधित कएथिन्ह. नोमानी जी मधुबनी जिला के जयनगर सं छथिन्ह. ओ कहलथिन्ह जे दरभंगा महराज इलाका के तरक्की के लेल... खुशहाली के लेल... शिक्षा के लेल बड़ काज कएलाह. मुदा ओ एहि बात पर दुख सेहो जतयलाह जे मिथिला के जे लोकनि कमाय लेल... काज लेल... नौकरी लेल बाहर जाइ छथि. ओतहिं के भ जाइ छथि. मिथिला के बिसरि जाइ छथि. वो ओहि ठामक तरक्की में त भागीदार होइ छथि मुदा मिथिला के पाछां छोड़ि दत छथि. अपन जुबान के भुला दैत छथि.
एहि अवसर पर मशहूर गायक उदित नारायण आओर दीपा नारायण कार्यक्रम सेहो भेल. उदित नारायण सं मिलय आओर ऑटोग्राफ लेबय लेल हुनका आगां पाछां भीड़ लागल रहल. समारोह में लोकगायिका विजया भारती सेहो अपन कार्यक्रम पेश कएलिह.

पत्रकार बनब...

ऑर्कुट पर हमर ज्यादातर मित्र... दोस्त पत्रकारिता लाइन में आबय चाहय छथिन्ह. नीक बात छै जतेक लोक अपन दिस सं अयताह अपन इलाका के विकास में ओतेक ज्यादा भागीदार होयताह. मिथिलाक सभ्यता... संस्कृति... परम्परा... लोक कथा के ओतेक आगां बढ़ा पयताह. तं सभ संगि लोकनि सं हमर इहे कहनाय छैनि जे अगर अहां एहि क्षेत्र में कदम बढ़ाबय चाहय छी... सफल होय चाहय छी त एकरा लेल सभसं पहिल आओर खास बात अहां में होबाक चाहि ओ अछि लेखन प्रतिभा.. अहांक लेखन शैली जतेक रोचक, सुन्दर होयत. आगां बढ़य के चांस ओतेक ज्यादा होयत. कामयाबी अहांके ओतेक जल्दी मिलत.
ओना कइटा लोक अहांके ऐहन मिलता जिनका देखि लागत कि हुनका में लेखन प्रतिभा जन्मजात छनि. लगत कलम में मां सरस्वतीक निवास छनि. ओ किछुओ लिखय छथिन्ह त नीके होइछ. मुदा जिनका में एहि तरहक बात नहिं छैन ओ दिन राति अभ्यास कए... दिन राति लिखैत-लिखैत एकरा हासिल कए सकैत छथि. जतेक बेसि लिखब अहांक लेखन ओतेक सुरुचिपुर्ण होयत... लोकक नस पकड़य में अहां ओतेक कामयाब होयब... हां किताब लिखय के होय तं साहित्यक पुट ज्यादा भारी भरकम शब्दक उपयोग... इस्तेमाल कय सकय छी... मुदा अगर लेख... पेपर...टीवी के लेल लिखय के होय त कोशिश करु कि ओ आम बोलचाल के भाषा में होय... लागय कि अहां पाठक...दर्शक सं सीधा बात कए रहल छी... दुनु आमने सामने छी. भने एक दुटा संस्थान में नौकरी नहिं मिलय मुदा अहां में लेखन प्रतिभा रहत त तीसरका संस्थान अहां के नौकरी... काज जरूर देत. एकरा लेल अहांके अपन पुरा लगन, उत्साह, उमंग आ आत्मविश्वास के संग काज करय पड़त.
अहां पत्रकारिता के एबीसी नहिं जानय छी कोनो बात नहिं... अहां के कि आबय अ...अहांक सभसं ज्यादा इन्ट्रेस्ट कोन क्षेत्र में अई. खेल में... फिल्म देखय में... चाय दोकान पर राजनीति पर गप्प मारय में... फोटो खिंचय में... गाड़ी के बारे में... कोन चीज में अहांक इन्ट्रेस्ट अछि ??? ...अहां ओहि क्षेत्र में आउ न... सभ तरहक पत्रकार के जरूरत छै. अहां खेल पर... फिल्म पर... राजनीति पर... फोटो फीचर पर ... ऑटो पर... फैशन पर... पेज थ्री कोनो विषय पर लिख सकय छी... अहां जाहि चीज सं जुड़ल छी ओहि में हाथ अजमा सकय छी. ओकरा बारे में रोज किछ किछ लिखैत रहु. कोनो दोस्त... पत्रकार सं देखबा लेल करु. पेपर मैगजीन में अहां अपन लगाव वाला विषय पर पढैत रहुं आओर देखिऔ कि केना लिखल गेल छै... चूंकि अहां ओहि क्षेत्र सं जुड़ल छी ताहि लेल अहां ओकरा सं जुड़ल टर्म के सेहो जाइनते होयब. कोनो खास दिक्कत नहि आयत. आई काल्हि हर खास चीज पर अलग अलग मैगजीन..पेपर निकलय लागल अ. टीवी में सेहो सभं विषय पर लोक के राखय जाय लगल अछि. एहि लेल ढेरों मौका मिलत...सिर्फ ओकरा पकड़य के बात छै. दिक्कत होय तं बाजार सं कोनो पत्रकारिता पर किताब खरीद बेसिक जानकारी ल सकय छी. हमरा मेल कय सकय छी... फोन पर बात कय सकय छी. नौकरी नहिं दय सकब मुदा रास्ता द बताए देब .आगा ईश्वर के मर्जी.

बेला पैलेस दरभंगा


दरभंगा में सभसं सुन्दर जगह में एकटा नाम अछि बेला पैलेस. ओना एहि परिसर में जाइ के मौका एके बेर मिलल अछि कॉलेजक जमाना में... मुदा छै बड़ सुन्दर. ओना राज परिसर... नरगौना परिसर... विश्वविद्यालय भवन सभ एक पर एक छै. मुदा ई सभ महाराजधिराज के बनावल अछि. बेला पैलेस महाराजधिराज कामेश्वर सिंह के छोट भाई राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह बनबौने छलथिन्ह. एकरा 1934 में आयल विनाशकारी भूकम्प के बाद बनावल गेल. करीब 65 एकड़ में फैलल एहि परिसर में आई काल्हि डाक प्रशिक्षण केन्द्र (Postal Training Centre) चलि रहल अछि.
भारत में पांचटा डाक प्रशिक्षण केन्द्र अछि. ओहि में दरभंगा के डाक प्रशिक्षण केन्द्र एक अछि. आओर ई डाक प्रशिक्षण केन्द्र 1966 सं एहि परिसर में चलि रहल अछि. एहिठाम बिहार... झारखंड... असम... उड़ीसा... पश्चिम बंगाल आओर पूर्वोत्तर राज्य के डाककर्मी... डाक अधिकारी सभ के ट्रेनिंग देल जाइत अछि. एहिठाम डाक सहायक, डाकघर निरीक्षक, रेल डाक सेवा ( Railway Mail Service) , बचत बैंक लिपिक के संगहि संग डाक विभाग सं संबंधित दोसरो प्रशिक्षण देल जाइत अछि.
ई दरभंगे... मिथिले नई... बिहारक लेल गर्वक बात अछि जे पूरा पूर्वोत्तर राज्य के डाक प्रशिक्षण दरभंगा में देल जाइत अछि. एहि कारणे एहिठाम प्रशिक्षण लेबय लेल देश के सभ हिस्सा... इलाका सं आबय वाला लोक सभ एतय के परम्परा... लोक संस्कृति... साहित्य... सं अवगत होयत छथि. कहल जाय त ई केन्द्र मिथिलाक साहित्य... संस्कृति के प्रचार प्रसार में चुपचाप अनमोल भूमिका निभा रहल अछि.

पद्मनाभ मिश्रजीक चिट्ठी

नारद बजलाह...

naradji.jpgकलयूगक स्वर्ग’क साइवर कैफे मे उपस्थित देवता लोकनिक अपन अपन क्यूबिकल मे बैसि अपन क्म्यूटर सँ चैट करैत छलाह. चारु तरफ बुझू जे अफस्यानी व्य्स्तता. किछु देवता याहू मैसेन्जर पर बैसल छलाह ते किछु ओरकुट पर. मुदा इन्द्र भगवान अपन गूगल टाक पर एखने लागिन केने छलाह कि गूगल टाक’क जीन्न तूरँत सूचना देल्कन्हि “नारद जी ओनलाईन”. जाबय धरि मे किछु सोचतथि ताबय मे नारद जी’क मैसेज एलन्हि, “नारयण! नारायण! भगवन! हम छी नारद मुनी, पृथ्वी लोक सँ सीधे आनलाइन, अपने सँ हमरा तुरन्त गप्प करबाक अछि. की अपने किनको आओर सँ बात करैत छा वा हम अपन बात बताबी… नारायण! नारायण!”

इन्द्र भगवान पुछि देलकन्हि, “जी नारद जी! अपने एखन पृथ्वी लोक मे छी बताबु जे मैथिली ब्लोग मे कोन प्रगति भेल अछि?

नारद जी कहय लगलाह, “हे राजन कतेक रास बात बहुत दिन सँ चलि रहल अछि. लगभग चारि साल होमय जा रहल अछि, मुदा एखन धरि ओतेक कोनो विशेष लोकप्रियता नहि भेटल अछि. पृथ्वी पर रहय वाला मिथिला वासी एखनो धरि मैथिली ब्लोगिंगक प्रति अभिरुचि नहि देखा रहल छथि. ओना हाल मे एकर लोकप्रियता कनिएक बढल अछि. आब लगभग ५० गोटा मैथिल प्रति दिन एहि ब्लोग “कतेक रास बात’क” भ्रमण करैत छथि. मुदा मैथिली मे लिखय वाला एखनो धरि एक्के दर्जन लोक छथि.

इन्द्र जी पुछल्थिन्ह, ” चलु से ते ठीक जे पचास गोटा ते मैथिली ब्लोग’क भ्रमण करैत छथि , नारद जी! मुदा तैयो कहल जाए जे पृथ्वी लोक मे मैथिली ब्लोग’क की हलचल भ’ रहल अछि”.

नारद उत्तर देलाह, ”हलचल ते बहुते छैक मुदा पाठके कम छथि. एखन धरि मे कत्तेक रास बात मे खट्टर काका’क भिन्सरबाक वर्णन अत्ति उत्तम अछि. जलकुम्भी नामक उपन्यास’क तेसर अंक लिखल जा चुकल अछि. ओतय बहुत जल्दीये वर्षा’क भविष्य तय होमय वाला अछि.”

नारद जी अपन बात केँ आगु बढबैत कहलाह, “नारायण! नारायण! मैथिली ब्लोग मे किछ नव मुदा ठोस खिलाड़ी प्रवेश कय चुकल छथि. जेना श्री हितेन्द्र कुमार गुप्ता जे हेल्लो मिथिला नामक ब्लोग ल’ केँ आयल छथि. सही अर्थ मे देखू ते ब्लोग’क सही प्रयोग केवल हितेन्द्र जी करैत छथि. आई काल्हि मिथिला मे जे भ’ रहल अछि ओकर वर्णन अपन ब्लोग हेल्लो मिथिला मे दिन प्रति दिन करैत रहैत छथि. सम्प्रति ओ अपन ब्लोग मे मैथिली केँ अष्टम सूचि मे शामिल केला’क बाद इग्नू’क पाठ्यक्रम मे मैथिली’क शामिल करबाक व्याख्यान केने छथि. हिनक ब्लोग मे निम्न लेख बहुत ग्यानोत्तेजक अछि- (१) इग्नू में मैथिली (२) छठक तैयारी (३) दीपावली आओर हुक्का-लोली (४) कहिआ खुलत आईआईआईटी ? (५) मैथिलीक पढ़ाई आ (६) मैथिली कहिआ ? . हितेन्द्र जी क मैथिली भाषा केँ इन्टरनेट पर आनबा मे अभूतपूर्व योगदान छन्हि.

इन्द्र भगवान बजलाह, “सत्ते हितेन्द्र जी धन्यवादक पात्र छथि. नारद जी सुनू साइवर कैफे सँ सीधे हितेन्द्र जी’क ब्लोग पर जाउ आ हमरा दिसि सँ धन्यवाद लिखि दियौक. नारद जी अपने रुकु नहि आ कहु जे मैथिली मे अपने कोन कोन ब्लोगक विजीट कयलहुँ”.

नारद मुनि बजलाह, ” नारयण! नारायण! मैथिली मे लगभग एक दर्जन ब्लोग आओर ब्लोग अछि. जेना श्री राजीव रँजन लाल’क हास परिहास, आ मैथिली लोकगीत दुनू अपन अपन जगह पर स्थान मे महत्ता राखय वाला.

नारद जी अपन बात केँ आगु बढबैत लिखलाह, “नारायण! नारायण! भगवन किछु किछु नव खिलाडी आओर प्रवेश कयने छथि. मिथिला मिहिर नामक नव ब्लोग मे श्री तारानन्द वियोगी टैग लाइन मे लिखैत छथि, ” अपना गामक लोक तकैत अछि चिडै… हमहूं अनभुआर टौन मे तकैत छी माटि-पानि…” हुनकर कविता नंदीग्राम पंचक , आ बभनगामाबाली भौजीक जीवनक चर्चा बहुते मर्मस्पर्शी अछि.

नारायण! नारयण! भगवन हम अपने केँ याद दियाबैत कहैत छी जे हिन्दी ब्लोगिँग’क महारथी श्री विजय ठाकूर जी सेहो मैथिली मे ब्लोग शुरु केने छथि जकर नाम थीक मिथिला - दर्पण मुदा एखन लागैत अछि जे ओ अपन काज मे किछु बेसीये व्यस्त छथि. तेँ जल्दी जल्दी नहि ब्लोगिँग क’ रहल छथि”.

ब्लोगिँग’क क्षेत्रमे प्रवेश कयनिहार किछु नव लोक छथि श्री अजीत कुमार झा जिनकर ब्लोग मैथिली प्रेमी एखने एखने शुरु भेल अछि.

((श्री पद्मनाभ मिश्र जीक माटिक लोक सं ))


विद्यापति स्मृति समारोह

दिल्ली के मावलंकर हॉल में पचीस तारीख रवि दिन मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह...आ कहु विद्यापति स्मृति पर्व समारोह मनाओल गेल. आम लोक के लेल मैथिली समारोहक मतलब गीत नाद होइछ... आओर गीत संगीतक बड़ नीक कार्यक्रम पेश कएल गेल. समारोह के उद्घाटन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कएलथिन्ह. आ एकर शुरुआत महाकवि कोकिल विद्यापति रचित गोसाउनी गीत...जय जय भैरवी असुर गोसाउनी सं हरिनाथ झाजी कएलाह. हरिनाथ जीक आवाज के मिठास के प्रशंसा खुद मुख्यमंत्री दी सेहो कएलथिन्ह.

हरिनाथजी के संगहि एहि समारोह में मैथिली के दोसरो कलाकार सभ अपन नृत्य आओर गायन सं लोकक दिल जीतय के प्रयास कएलथिन्ह. सुनील कुमार पवन... सुरेश पंकज... सुश्री विभा झा...सुश्री आभा... सुश्री रश्मि झा के ..गीत...गाना पर लोक सभ झुमि उठलाह... मैथिलीक गाना सुनि लोक सभ मंत्र मुग्ध भए गेलाह. मिथिलाक जतेक मैथिल भाई लोकनि एहिठाम जुटल छलाह ओ गीत-संगीत कार्यक्रमक जमि कए आनंद उठएलाह... जट जटिन...झिझिया.. के नाच सेहो बड़ दिन बाद देखय के मिलल. मिथिला के कइटा लोक तं एहन मिललाह जिनकर कहनाय छलन्हि जे हुनका एहि तरहक कार्यक्रम के आनंद कई साल के बाद मिललैन अ. दिल्ली में रहय वाला मैथिल के लेल अपन मिथिलाक संस्कृति आ विरासत सं एक बेर फेर मिलय के लेल... जुड़य के लेल... ई बड़ नीक मौका साबित भेल... मिथिला सं बाहर एहन कार्यक्रम बेर बेर होयबाक चाहि. आपस में एकटा.. एकजुटता लाबय के लेल एहि तरहक कार्यक्रम के जरूरत छै. सिर्फ कहिने से नहि होयत कि आबय वाला दिन में दिल्ली पर बिहारी ... मिथिलाक लोकक राज होयत... एकरा लेल एहने सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से लोक के आपस में जोड़य के जरुरत छै. सम्पर्क बढ़ाबय के जरूरत छै.

दिल्ली में मैथिली अकादमी

दिल्ली में मैथिली अकादमीक स्थापना कएल जाइत. एकर घोषणा दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह में कएलथिन्ह. दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित मिथिला विभूति (विद्यापति, सलेस लोरिक, अमर शहीद ललित नारायण मिश्र, सूरज नारायण सिंह, डॉ आदित्य नारायण झा, भोला पासवान शास्त्री, कर्पुरी ठाकुर, नागार्जुन एवं ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म ) स्मृति पर्व समारोह 2007 के उद्घाटन के मौका पर मुख्यमंत्री कहलथिन्ह जे दिल्ली में मैथिली आ भोजपुरी अकादमी के स्थापना के लेल जे सरकारी खानापू्र्ति छै ओकरा तीन चारि महीना के भीतर पुरा कए लेल जाएत.

मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह... विद्यापति स्मृति समारोह... के आयोजन अखिल भारतीय मिथिला संघ के तरफ सं भेल. सभाक अध्यक्षता पूर्व सांसद श्री आर पी यादव कएलाह. एहि समारोह के स्वागताध्यक्ष मधुबनी के सांसद आओर केन्द्रीय मंत्री डॉ शकील अहमद छलाह. ओ मिथिलाक परम्परा के मुताबिक पाग आ शाल सं मुख्यमंत्री के स्वागत कएलथिन्ह. एहि अवसर पर कएटा विधायक आ विद्वान सभ सेहो उपस्थित छलाह..हुनकर स्वागत सेहो पाग..शाल सं कएल गेल. स्वागत के बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित महाकवि विद्यापति के चित्र पर माला पहिना आ दीप जला समारोह के उद्घाटन कएलिह. ओ दिल्ली के विकास में बिहारक लोक के भूमिका के सराहना कएलथिन्ह.. एहि अवसर पर मिथिलाक विकास सं संबंधित मुद्दा सभ सेहो उठल. अखिल भारतीय मिथिला संघ के महासचिव श्री विजय चंद्र झा जीक तरफ सं एहि मौका पर मुख्यमंत्री के सामने जे मांग राखल गेल ओहि में प्रमुख अछि... दिल्ली में मैथिली अकादमी के स्थापना होय... छठ पावनि पर छुट्टीक घोषणा होय... दिल्ली विश्वविद्यालय में मैथिली बेंचक स्थापना कएल जाए...कोलकाता विश्वविद्यालयत तरहें एहिठाम सेहो मैथिली में पढ़ाई शुरू होय... संगहि- संग विद्यापति... आदित्य नाथ झा आओर ललित बाबू के नाम पर सड़कक नाम राखल जाय. केंद्रीय मंत्री डॉ शकील अहमद कहलथिन्ह जे मिथिलांचल में रेल सम्पर्क के जाल बिझाउल जाइत... लौकहा..मधुबनी...बेनीपट्टी होयत सीतामढ़ी के जोड़ल जाइत.. हर गाम घर के टेलीफोन से जोड़त जाइत.
एहि समारोह में मैथिली के आठम अनुसूची में शामिल भेला खुशी सेहो व्यक्त कएल गेल आ बताओल गेल जे एहि बेर यूपीएसी... सिविल सर्विसेज में 12 टा लोक मैथिली सं परीक्षा दए रहल छथि... बीपीएससी के परीक्षा में सेहो सैकड़ों लोक मैथिली विषय सं शामिल होयताह.
एहि समारोह लेल अखिल भारतीय मिथिला संघ के जतेक प्रशंसा कएल जाय कम अछि... एहि तरहक कार्यक्रम... समारोह सं अपन इलाका...गाम घरक लोक सं मिलय के मौका मिलैत अछि...आजुक आधुनिक ...तेज रफ्तार सं भागैत दुनिया में ओ अपन लोक सं मिलय लेल दु पल दैत छथिन्ह... मौका उपलब्ध करैत छथिन्ह ई बड़का बात अछि. हम उम्मीद करैत छी जे ओ साल में दु-चारि टा एहन समारोह.. कार्यक्रम करबाबैत रहता जाहि सं लोकक के मनोरंजन तं होयबे करत... मिथिलांचलक समस्या...दुख-सुख...परेशानी सं दु-चारि होबाक मौका सेहो मिलत.आओर जखन तक एहि सभ के जानबय नहिं तखन तक एकरा दूर करय के प्रयास कोना होयत.एहि के लेल संघ के महासचिव विजय चंद्र जी के खासतौर पर बधाई के पात्र छथि. मिथिलाक विकासक लेल हिनके जकां लोकक जरूरत छै जे एहि तरहे अभियान में जी-जान सं जुटल रहताह.

झंझारपुर के जिला बनयबाक मांग

झंझारपुर के जिला बनाबय के मांग जोर पकड़य लागल अ. एहि के लेल लोक सभ आब सड़क पर सेहो उतरय लगलाह अ. एहि शुक्र के झंझारपुर बंद सेहो राखल गेल. दोकान...स्कूल सभ बंद रहल... जिला बनाओ संघर्ष समिति बनाक एहि ठामक युवक सभ आब मैदान में उतरि पड़लाह अ. झंझारपुरक युवक सभ झंडा बैनर लेने मार्च सेहो कएलाह... युवक सभ के स्थानीय लोकक सेहो पुरा सहयोग मिलि रहल अछि. आ शांति मार्च में ओ लोकनि सेहो बढ़ि-चढि क शामिल भेलाह.
शांति मार्चक बाद एकटा मीटिंग सेहो भेल... मीटिंग में ई बात पर जोर देल गेल कि जखन तक जिला नहिं बनत...इलाका के समग्र विकास संभव नहिं अछि...आ विकासक लेल लोक के संघर्ष के रास्ता पर चलय पड़त...किछु दिन कष्ट सहलाके बाद जिला बनला पर आबय वाला पीढी के फायदा होयत. झंझारपुर अखन मधुबनी जिला में पड़य अछि. झंझारपुर दरभंगा से करीब पैंतीस-चालीस किलोमीटर दूरी पर अछि. ई रेल आ बस दुनु स मार्ग स जुड़ल अछि. दरभंगा सं निर्मली वाला ट्रेन झंझारपुर दक जाइत अछि.

बिस्फी में आईटीआई कॉलेज


बिस्फी में आईटीआई कॉलेज खुलत. बिस्फी के नई जानय छ ? बिस्फी अपन मैथिली के महिकवि विद्यापतिजीक जन्मस्थान अछि. मैथिली के आई जे ई स्थान दुनिया भर में मिलल अई ओहि में सभसं बेसि योगदान विद्यापतिजी के छैन. बिस्फी मधुबनी जिला में पड़य छै... कवि कोकिल विद्यापति जी कहने छथिन्ह देसिल बयना सबजन मिट्ठा...यानी अपन भाषा...बोली सभ सं मधुर होइछ. आओर आब हुनकर गाम बिस्फी में आईटीआई खुलत ई बड़ खुशी के बात अछि. बिस्फी हमर गाम सं कनिए दूर अछि... कई बेर जाई के मौका मिलल अछि. मुदा हुनकर डीह उपेक्षित परल अछि. चलु देर सं सही आखिरकार सरकार के नींद त खुलल.
असल में बिस्फी में एहि बुध आ गुरुवार दिन विद्यापति स्मृति पर्व समारोह मनायल गेल... सांस्कृतिक कार्यक्रम भेल... नेता सभ अयलाह... भाषणबाजी भेल... मुदा एकटा नीक बात ई भेल जे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सेहो अयलाह... आओर अयलाह पर एहिठामक हालत देखि दुखि भेलाह . ओ कहलथिन्ह जे विद्यापति डीह के पर्यटक स्थल बनाबय लेल हर संभव प्रयास कएल जाइत. ओ कहलथिन्ह जे हम एहि पवित्र भूमि के नमन करय छी जतय कि विद्यापति जैसन महाकवि के जन्म भेल छलन्हि. अहि अवसर पर ओ सभ जाति... धर्म के लोक के हर साल विद्यापति पर्व समारोह खुब उत्साह सं मनाबय के लेल कहलथिन्ह.
अपन भाषण में मुख्यमंत्रीजी ई घोषणा कयलथिन्ह जे बिस्फी में जल्दीए आईटीआई खुलत.. एकर साथ ओ एहि ठाम विद्युत उपकेन्द्र सेहो खोलबाक बात कहलथिन्ह. विद्यापति स्मृति पर्व समारोह में मुख्यमंत्री के संग उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री डा सीपी ठाकुर, हुकुमदेव नारायण यादव सेहो आयल छलाह. ठाकुर जी कहलथिन्ह जे ओ सभ मिलि कए मिथिलांचल आओर मैथिली के विकास के लेल प्रयाल कए रहल छथि.

ओना एकटा बात आओर छै जे बिहार के नौ जिला में जल्दीए पॉलिटेक्निक कॉलेज खुलत...ई कॉलेज मधुबनी... सीतामढ़ी... शिवहर... मधेपुरा... अररिया... सुपौल... कटिहार... पूर्वी चम्पारण आओर पश्चिमी चम्पारण जिला में खुलत. अखन बिहार में तेरह टा पॉलिटेक्निक कॉलेज अछि


बसक आसरा...

दरभंगा-जयनगर के बीच ट्रेन सं यात्रा करय वाला लोक सभक परेशानी दूर नहिं भेल अ. रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव जखन दरभंगा सं जयनगरक बीच बड़ी लाइन के उद्घाटन कएने छलाह तं लोक सभ बड़ खुश भेल छलाह. मुदा आब स्टेशन पर बैठि कय जखन घंटों इंतजार करैत रहैत छथि त रेलवे के कोसैत रहय छथि. घंटों गाड़ी के रास्ता देखैत रहुं... आ गाड़ी छै जे आबय के नाम नहिं लैत रहय छै... गंगासागर आओर घुरियान एक्सप्रेस ज्यादातर दिन लेटे रहैत अछि. दफ्तर जाय वाला लोक सभ आओर पढाई लिखाई करय वाला छात्र लोकनि आब रेलक इंतजार करय सं बेहतर बस सं निकलि जनाय समझय छथि. स्टेशन सभ पर साफ सफाई सेहो के ओतेक सुविधा नहिं अछि.
किछ ट्रेन चलबो करैत अछि त ओकर टाइम एहि तरहे अछि जकरा बेटाइमे कहि सकय छी. चारि-चारि घंटा तक ट्रेनक कोनो दर्शन नहिं होय छै. साढ़े ग्यारह के ट्रेन छुटल त सवा चारि बजे तक इंतजार करैत रहुं... दरभंगा सं जयनगरक बीच सकरी... पंडौल... मधुबनी... राजनगर... खजौली के लोक सभ त आब ट्रेनक आसरा छोड़ि बसक यात्रा करनाय शुरू कए देलाह अछि. लोक सभक कहनाय छैन्हि जे अगर सुबह -शाम दफ्तरक समय एक-एकटा डीएमयू ट्रेन दुनु तरफ सं भ जाय त आधा परेशानी अपने आप खत्म भ जायत. मुदा रेलवे के आला एफसर सभ अहि पर ध्यान नहिं द रहल छथिन्ह.
ओना रेल मंत्री उद्घाटन के समय गरीब रथ सहित कईटा आओर नबका ट्रेन चलाबय के बात कहने छलथिन्ह. मुदा अखन तक त ओकरा शुरू होबय के कोनो संकेत नहिं मिलि रहल अछि. एहि ठामक लोक सभ एहि बारे में रेलमंत्री आओर अपन सांसद महोदय के अर्जी सेहो देलखिन्ह अ. हुनका भरोस छन्हि जे आब हुनकर सांसद महोदय रेल मंत्री पर दबाव बना किछु नब ट्रेन शुरू करबा पयताह.


मिथिलांचलक लोकपर्व सामा-चकेबा

सामा-चकेबा मिथिलांचलक एकटा खास लोक पर्व अछि. ई सिर्फ मिथिलांचले टा में मनायल जाइत अछि. ई मिथिलाक लोक संस्कृति सं जुड़ल त अछिए..एकर पौराणिक मान्यता सेहो अछि. कहल जाइत अछि जे सामा भगवान श्रीकृष्ण के पुत्री श्यामा छलिह जे अपन पिताक श्राप के कारणे चिड़िया बनि गेलिह. एकर जिक्र विष्णु पुराण में सेहो मिलैत अछि. सामा चकेबा असल में भाई बहिनक प्रेमक पावनि अछि. अहि में सामा चकेवा... सतभइया... बृंदावन... चुगला... ढोलिया बजनिया... बन तितिर ...पंडित आओर दोसर मूर्ति खिलौना सं खेलल जाइत अछि... सन स बनल चुगला के जलायल जाइत अछि... पूर्णिमा के दिन विदाई देल जाइत अछि आओर अंत में विसर्जन कए देल जाइत अछि.
कहल जाइत अछि जे भगवान श्रीकृष्णजी के बेटी श्यामा... सामा के जंगल में खेलय के शौक छलन्हि... अपन एहि प्रकृति सं जुड़ल रहय के शौक... प्रकृति के गोद में असीम शांति मिलय के शौक... फूल पत्ती... पक्षी सं खेलय के शौक के लेल ओ हर दिन पौ फूटतहिं जंगल चलि जाइत छलिह. सामा के प्रकृति सं जुड़य... गाछ-बृक्ष... पशु-पक्षी सं खेलय के ई बात चुगला के नीक नहिं लागल. ओ सामा के बारे में अंट संट...उल्टा पुल्टा बात सभ जाक श्रीकृष्ण जी के बता देलक. एहि पर खिसियाक कृष्ण भगवान सामा के चिड़िया बनि जाइ के श्राप दय देलथिन्ह. जहि सं सामा चिड़िया बनि गेलिह.
कई वर्षक बाद जखन कृष्ण भगवान के पुत्र भेलन्हि तं हुनका अपन बहिन के बारे में पता लगलन्हि. बहिन के बारे में जानला के बाद ओ बहिन के श्राप मुक्त करय आ वापस लाबय लेल लगि गेलाह. ओ जिद ठानि लेलन्हि जे बहिन के बिना जिंदा नहिं रहताह. हारि कय भगवान के कहय पड़लन्हि जे कार्तिक मास के अहांक बहिन अयताह आओर पूर्णिमा के विदा भय जयताह. तहि दिन सं भाई- बहिनक प्रेमक.. स्नेहक ई पावनि...सामा चकेबा के रूप में मनावल जाइत अछि.


सामा-चकेबा शुरू

छठ खत्म होयतहिं अपन मिथिलांचल में भाई बहिनक प्रेमक...स्नेहक पावनि सामा चकेबा शुरू भय जाय छै. जखन छोट छलहुं त गाम घर में दीदी...बुआ सभ के सामा चकेबा खेलैत देखय छलह...आओर हमहुं सभ ओहि में किछ न किछ करैत रहय छलहुं...बच्चा में ई सभ करय में बड़ मन लगय छै...नहिं किछ तं चुगला के जराबय के काज त होयते छल...आओर आखिरी दिन खाई लेल सेहो प्रसाद सभ मिलय छल.
मिथिलांचल में ई पावनि बड़ उत्साह सं मनायल जाइत अछि...छठ सं पहिनहिं सं हाट बाजार में सामा चकेबा के मूर्ति सभ बिकय लागय अछि. बाजार रंग-बिरंगा सामा चकेबा के मूर्ति सभ सं पाटल रहय छै. ओना कइटा मूर्ति घर पर सेहो बना लेल जाइत अछि. सामा चकेबा आमतौर पर कार्तिक शुक्ल पक्ष के सप्तमी सं शुरू होयत अछि...छठ के आसपास अहां हर घर में लड़की सभ के सामा चकेबा बनाबैत...खेलैत देखि सकय छी...छठ के बाद हर राति सामा चकेबा खेलैत समय गीत गायल जाइत अछि. जट्ट जट्टिन सेहो गायल जाइत अछि. भाई बहिन के भावनात्माक रिश्ता के मजबूती देबय वाला ई पावनि पूर्णिमा तक चलैत अछि.
सामा चकेबा में सामा चकेबा..बाटो बहिनो..चुगला...बृंदावन...ढोलिया..बजनिया...बन तितिर सभक मूर्ति बनायल या बाजार सं खरीद कय लायल जाइत अछि...सांझ के बाद घरक लड़की..महिला... छोटगर नुनु सभ एक ठाम जमा भय सामा चकेबा खेलय छथि. जतेक मूर्ति होय छै ओकरा सूप में सजा लेल जाइत अछि. गीत गायल जाइत अछि...समदौन..लच्छही..सोहर मुदा सभ में भाई बहिनक प्रेम के जिक्र जरूर रहय छै.खरना सं पूर्णिया तक ई सभ होय छै आओर पूर्णिमा के दिन पहिने सामा के पूजा होयत अछि. चूड़ा... दही... मिठाई... बताशा... मुरही सं भोग लगायल जाइत अछि. बाटो बहिनो के रास्ता के दुनु तरफ रखल जाइत अछि. चुगला.. बृंदावन के जलाबय जाइत अछि... ढोलिया बजनिया... बन तितिर आओर दोसर खिलौना सं खेल ओकर विदाई कएल जाइत अछि...चाउर दाल सब्जी आओर दोसर सामानक पेटारी...डाला सजायल जाइत अछि...जेना बेटी के विदाई के समय समान देल जाइत अछि ओहिना समान देल जाइत अछि...सामा के खोंइच सेहो देल जाइत अछि...सामा चकेबा के फोड़ल ठेहुन पर ल क फोड़ल जाइत अछि... बाद में ओकरा खेत... माइट में आ पोखरि में विसर्जित कए देल जाइत अछि. कहल जाइ छै जे अहि अवसर पर बहिन अपन भाई लेल जे मन्नत मांगय छथिन्ह ओ जरूर पूरा होयत अछि.

गामक लोक

आई गामक एकटा संगी सं भेंट भेल... ओ किछु निराश लगय छलाह...खोंचरलाह पर कहलाह जे लोक सभ हुनका देहाती...अनाड़ी...गमार कहय छथि..जबकि ओ हुनका सं कोनो मामला में कम नहिं छथिन्ह...हम हुनका कहलयन्हि जे अहां निराश किएक होय छी... अहां कहिऔ जे हां हम गाम घर सं छी...देहात सं छी मुदा...मुदा अहां जे आनन्द मस्ती ल लेने छी ओतय त ओ कहिओ नहिं लय सकय अ...सिर्फ ईहे बात अछि जे कि अहां ओकरा तरहे मैनेजमेंट के नौकरी नहिं सरकारी नौकरी कय रहल छी... मुदा कम की छी... अहां गाम घर..देहात के बारे में त सभ जानिते छी...शहरक रहन सहन...कॉलेजक पढ़ाई...लड़की संग घुमनाय...डिस्को... पार्टी... बोतल... सभ कएने छी...त कोन मामला में कम छी...अहां निफिक्र रहु आ आब जे ओ बोलत त जमि क डॉयलॉग सुना दिअऊ.
एहन कई बेर भ जाई छै...मुदा गाम में रहय के किछु अलगे आनन्द छै. एक बात छै जे गामक लोक...युवक जे आनन्द अपन जीवन के लैत छथि वो शहरक युवक नहिं लय पाबैत छथि...जखन कि गामक लोक गामक आओर शहरक दुनु जीवनक आनन्द ल लैत छथि...ओ गामक हर पावनि.. ,रीति रिवाज... लोक संस्कार... सं त परिचित रहिते छथि शहरक चाल चलन में सेहो पाछा नहिं रहैत छथि...गामक खेत खलिहान...दलान...मटरगश्ती एकर मजा शहरक युवक नहिं उठा पाबैत छथि मुदा गामक युवा त गाम... शहर दुनु जगह अपन परचम लहरौने रहैत छथि.
शहर क युवक सभ जूड़ि शीतल... बरसाइत... चौरचन... कोजगरा... सामा चकेवा... कोहबर... अल्हुआ.. सुथनी..किशौर...कंसार वाली के हाथक भुजा...कुसियार खेत में कुसियार खनाय.. मटर तोड़ि खनाय...ई सभ सं अनजान रहय छथि. गुल्ली डंडा...कंचा..गोली खेलनाय...कबड्डी एहि सभक मस्ती नहिं लय पाबय छथि.. आमक.. लतामक ...कटहलक गाछी में घुमनाय... टिकुला चुननाय ...दोसराक गाछी सं ढेला मारि फल तोड़नाय... जामुन बिछनाय...इमली खयनाय ... खजुर बिछनाय... एकर आनन्द किछ आर अछि. नहिं किछ त दिन भर गप्प मारय छी... ताश खेलय छी... पोखरि में डुबकि मारय छी... बंसी लय पोखरि कात में बैठि माछ मारय छी... एकरा कि कहल जाय... कि एकर आनन्द शहर में मिलि सकय अ ? कहिओ नहिं.
दुर्गा पूजाक मेला होय आ इन्द्र पूजाक... जन्माष्टमीक भीड़ भाड़... मेलाक अंतिम दिन छुरा-छुरी भोकनाय वाला दृश्य...कोनो ठाम पोखरक कात में मेला ...त कतोउ खेत में मेला...रामलीला... थियेटर... लक्ष्मण झूला... सांडक लड़ाई... खस्सी बोतो केर लड़ाई... आ फेर मवेशीक पूजा पखेब होय... सभ गाम घर में देखबा लेल मिलत... एहि हिसाब सं गामक लोक सभ हरफनमौला... ऑलरांउडर होय छथि... सभक आनन्द ... मस्ती लेने रहय छथि.. ताहिं लेल गामक लोक के...युवक के... शहरी युवक...लोक सं अपना के कोनो दृष्टि सं कमतर नहिं मानय के चाहि . कय मामला में ओ हुनका सं सवा सेर साबित होय छथिन्ह.

इग्नू में मैथिली

संविधान के अष्टम अनुसूची में शामिल होए के बाद मैथिली एक बेर फेर सं विकासक डगर पर चलि परल अछि... सरकारी कामकाज...रेडियो... टीवी प्रसारण... मैथिलीक सॉफ्टवेयर सं लSक पढ़ाई लिखाई तक... हर क्षेत्र में काजभ रहल अछि... आब तं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय...IGNOU सं सेहो मैथिली में पढ़ाई शुरू होबय जारहल अछि...उम्मीद अई जे अगला साल 2008 के जुलाई सं पढ़ाई शुरू भ जायत...IGNOU के दरभंगा में क्षेत्रीयकेन्द्र छै आओर कहल जाय त एक तरहे ई पूरा उत्तर बिहारक केन्द्र अछि...चंपारण सं लSक पूर्णिया सहरसा तकके विद्यार्थी दरभंगा के क्षेत्रीय केन्द्र के माध्यम सं पढाई कय रहल छथि... क्षेत्रीय केन्द्र राज परिसर में ललितनारायण मिथिला विश्वविद्यालय के भवन में चलि रहल छै... ई सेंट्रल बैंक सं सटल छै.

IGNOU के स्नातक स्तर के जे ई आधार पाठ्यक्रम शुरू होय वाला अछि ओहि में मिथिलांचलक गौरव... विशेषता... संस्कृति... साहित्य के समुचित स्थान देल जायत... मिथिलाक पोखरि... माछ... पान... मखान आओर सिंघाड़ा ( पोखरि वाला) सेहो पाठ्यक्रम में अहांके पढ़य लेल मिलत...पाट्यक्रम के मकसद..उद्देश्य रहत लोकके मैथिली भाषा के प्रकृति... विशेषता सं परिचित करानाय.

मैथिली पाठ्यक्रम के फिलहाल चारि खंड में बांटल गेल अछि आओर चारू खंड के छह-छह यूनिट में कए देल गेल अछि... पूरा मिलाक 24 यूनिट...इकाई रहत. पहिल खंड में भाषा तत्व आ बोध रहत... जेहि में तिरहुता आ देवनागरी लिपि आ वर्तनी-परिचय... मैथिलिक ध्वनि... विज्ञान विषयक बोध... संस्कृति विषयक बोध आओर शब्दकोशक उपयोग... समाज विज्ञान विषयक बोध आओर निबंध-रचनाक परिचय तथा भाषण शैली रहत.

दोसर खंड वाचन आ विविध विषयक रहत... जेहि में सामाजिक विज्ञानक भाषा आओर वर्तनिक किछु नियम... सामाजिक विज्ञानक भाषा एवं शब्द रचना... मानविकी... भाषा ओ विश्लेषण... विज्ञानक भाषा आओर परिभाषिक शब्द... विज्ञानक भाषाक स्वरूप तथा विधि एवं प्रशासनिक भाषा ... परिभाषिक शब्द आ अर्थ रहत'

तेसर खंड साहित्य सं जुड़ल रहत एहि में कथा... ललित निबंध... एकांकी निबंध... आत्मकथा आओर कविता रहत... जबकि अंतिम चारिम खंड व्यावहारिक मैथिली आ लेखन के रहत... जेहि में शब्द आ मुहावरा लोकोक्ति... संवाद शैली... सरकारी पत्राचार.. टिप्पणी आ प्रारूपन...समाचार लेखन आ संपादकीय... अनुवाद... संक्षेपण भाव-पल्लवन आ निबंध-लेखन रहत.

मैथिली के पूरा पाठ्यक्रम IGNOU के क्षेत्रीय निदेशक डा. एएन त्रिपाठीजी के नेतृत्व में तैयार कएल गेल अछि...हुनका छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम के मदद मिललन्हि अछि..छह सदस्यीय टीम में डा. भीमनाथ झा... डा. देवेन्द्र झा... डा. एनएन झा... डा. नीता झा... डा. एके वर्मा आओर श्री एनसी मिश्र शामिल छलाह..

खुशी के एकटा आओर गप्प ई अई जे IGNOU सं मैथिली के पढ़ाई तं शुरू होयबे करत...मिथिलाक्षर में पढ़ाई सेहो होयत...अखत तं मैथिलीक पढ़ाई देवनागरी लिपि में होयत...जे कि अहां अखन हमर लिखल पढ़ि रहल छी...मुदा IGNOU में तिरुहुता...मिथिलाक्षर में पाठ्यक्रम शुरू करय के विचार सेहो छै... संगहि संग मिथिलाक्षर में लिखल पांडुलिपि के दोसर भाषा में अनुवाद सेहो कएल जायत...भ सकय अ मैथिली में क्रिएटिव रायटिंग के पाठ्यक्रम सेहो शुरू होय..आओर ई मिथिलाक्षर में शुरू भ सकैत अछि. त अहां सभ तैयार रहुं...मैथिली में बड़ मौका मिलत..अहांक सामने अपार संभावना दिखय लगत...केवल ऊ मौका के पहचान पकड़य के जरूरत अछि... आब मैथिली के दीन हीन मानय के जरूरत नहिं . सिर्फ नब नब अवसर बनावय के जरूरत छै. रास्ता अपने बनैत जायत...जय मिथिला..जय मैथिली.

छठक तैयारी

मिथिलाक सभस महत्वपूर्ण पावनि अछि छठ...आओर अखन गाम-घर, शहर सभठाम छठक तैयारी जोर शोर सं चलि रहल अछि...छठ में भगवान सूर्य के पूजा होइछन्हि...छठ पावनि हर साल दिवाली के बाद कातिक महीना के छठा दिन होइछ...कहि सकय छी जे कातिक मास के इजोरिया में षष्ठी तिथि के छठ पावनि शुरू होइ छै...कहल जाइछै जे भगवान दिनकर के पूजा...आराधना मात्र सं सभ मनोकामना पूरा होइ छै...तीनों लोक में शक्ति के संचार होइ छै...पूजा के लेल पोखरि...नदीक घाटक साफ -सफाई शुरू भ गेल अछि...एहि पावनि में शुद्धता, साफ-सफाई के विशेष ध्यान रखल जाइ छै...पूजा में काम आबय वाला सामान सभ सं बाजार पटल परल अछि...टोकरी, सूप, डाला...पूजाक सामान, फल-फूल सं बाजार के माहौल रंगीन बनल अछि...पूजा में ईख (कुसियार) ,मूली, नींबू, अरुआ, सुथनी, अरकपात काम आबय छै...नबका कपड़ा, श्रृंगारक सामान...लहठी सेहो घऱ में आबय छै...बच्चा सभ के तं पटाखा छोड़य के मौका सेहो रहय छै...ओना एहि बेर सामानक दाम खूब बढ़ल छै जाहि सं लोकक बजट सेहो बिगड़ल छै...दुर्गापूजा, इन्द्र पूजा, कोजगरा, दिवाली, चित्रगुप्त पूजा, काली पूजा सभके एक के बाद एक लगले होई सं खर्चा सेहो बड़ बढ़ल छै...आओर एहि बेर बाढ़ि के परेशानी तं छैबे छल.
एहि बेर संझका अर्घ्य सोलह तारीख शुक्र दिन अछि आओर भोरका अर्घ्य सत्रह तारीख शनि दिन अछि...दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया, समस्तीपुर आओर बरौनी..पटने नहि दिल्ली में सेहो जोर शोर सं तैयारी चलि रहल अछि...घाटक सफाई भ रहल अछि...प्रशासन तरफ सं भ रहल अछि कई ठाम लोक सभ अपने भिर क साफ सफाई करि रहल छथिन्ह...छठ के मौका पर तं पूर्णिया के सौरा नदी के सिटी घाट पर गोताखोर दल के लगायल गेल अ...नाविक सभ सेहो दस बारह टा नाव सं घाट पर नजर रखने रहताह.

अन्नकूट, पखेब,भाईदूज आओर चित्रगुप्त पूजा

दीपावली देखल जाय त एक दिनक पावनि नहिं अछि...ई पांच दिनक पावनि अछि जे धनतेरस सं शुरू भ भाईदूज के खत्म होयत अछि...ई कातिक अन्हरिया के त्रयोदशी सं शुरू भय इजोरिया के द्वितीया तक पंच महोत्सव के रूप में मनाबय जाइत अछि...त्रयोदशी के धनतेरस, चतुर्दशी के नरक चतुर्दशी या छोटका दिवाली, अमावस्या के दिवाली, प्रतिपदा के अन्नकूट या गोवर्धन पूजा या पखेब...आओर द्वितीया के भाईदूज आओर चित्रगुप्त पूजा.
धनतेरस के भगवान धन्वन्तरि के पूजा होयत अछि..अहि दिन नबका बर्तन खरीदनाय शुभ मानय जाइत अछि...व्यापारी सभ अपन खाता बही के पूजा करैत छथिन्ह..अगिला दिन नरक चतुर्दशी के नहाय खाय के रिवाज छै...हनुमानजी के पूजा सेहो कएल जाइत अछि...हनुमान जयंती के एक दिन बाद दिवाली में दिया-बाती जलायल जाइत अछि...लक्ष्मी गणेश जी के पूजा कएल जाइत अछि...प्रतिपदा के अन्नकूट...गोवर्धन पूजा आ अपन मिथिलांचल में पखेब पूजा होयत अछि...एहि दिन लोक सभ अपन जतेक गाय, बैल, भैंस, बकरी पोसने रहय छथिन्ह... हुनका नहा-धोया क पूजा करय छथिन्ह... गला में नबका रस्सी पहनायल जाइत अछि...देह, पैर, सिंग में तेल लगाबय जाइत अछि...पैर में घुंघरु..गला में सेहो घुंघरु...कौड़ी सं बनल गरदाम पहनायल जाइत अछि...लाल, पियर..हरिहर रंग सं सजाबल जाइत अछि...गाय..बैल के रूप..सुन्दरता देखते बनैत अछि...एहि दिन कोनो काज सेहो नहिं लेल जाइत अछि...

गोवर्धन पूजा के अगिला दिन यम द्वितीया...भाई दूज आओर चित्रगुप्त पूजा होयत अछि...भाई दूज...भाई बहिनक पानवि अछि...एहि दिन मिथिला के कायस्थ परिवार के लोक सभ चित्रगुप्त पूजा करय छथिन्ह...मुदा एहि में दोसर समुदाय के लोकसभ सेहो हिस्सा लयत छथिन्ह...हम सभ सेहो कायस्थ परिवार सं नहिं भेला के बादो एहि में बढ़ि-चढ़ि के हिस्सा लैत छलहुं आओर सांस्कृतिक कार्यक्रम सभ सेहो करैय छलहुं...अहि दिन भगवान चित्रगुप्त जी के मूर्ति के साथ कलम दवातक पूजा कएल जाइत अछि...अहि दिन पढ़ाई लिखाई के काज नहिं होयत अछि.

दीपावली आओर हुक्का-लोली



ऑर्कुट पर एकटा संगी छथिन्ह अल्का रंजन...अपन मिथिलांचल सं छथिन्ह...दीपावली सं एक दिन पहिने हुनकर स्क्रैप आयल जे सर मटिया तेल में हुक्का-लोली भिजौने छी कि नै?? सत्य कहल जाय त हम हुक्का लोली के अहि ठाम अयला पर एकदमे सं बिसरि गेल छलहुं..अल्काजी के स्क्रैप अयला पर मन गदगद भ गेल...मन भेल जे भरि पांज भरि क चुमि लिअ...मुदा एकटा तं ऑर्कुट छोड़ि कोनो जान पहचान नहिं..दोसर लड़की.... हुनका जतेक धन्यवाद देल जाउ कम छै... मुदा एहि बात सं मन में कचोटि सेहो भेल जे आई के जमाना के संगहि हम सभ सेहो बदलि गेलहुं अ... आओर हम सभं अपन परम्परा सं बड़ दूर आबि चुकल छी... परम्परा के बात छोडुं सभ किछु बदलि गेल अछि...पूजा-पाठ...दिया-बाती...डिबरी... मनाबय के रंग-ढंग सभ किछु... दिया-डिबरी के जगह आब बिजली के झालर...रंग बिरंगा बत्ती...चाइनीज सजावट के सामान लय लेलक अछि.


दिवाली आबय सं हफ्ता भर पहिने सं हुक्का लोली के तैयारी शुरू भय जाय छल...आओर एक दिन पहिने सं ओकरा मटिया तेल में भींगा कय रखि दैत छलहुं...सांझ होयते हम सभ बच्चा सभ हुक्का-लोली भांजय लगय छलहुं...ओना हुक्का-लोली भांजय के मिथिलांचल के परम्परा मूज...संठी में आगि लगा के जलावय के छै...आओर एहि में सं बचल संठी सं दिवाली के अगला दिन सूरज देवता के निकलय सं पहिने डगरा पीटय के रिवाज छै..ओना आब तं डगरा...सूप डेंगाबय के परम्परा सेहो खत्म भेल जा रहल अछि...एहि में जखन हम सभ बच्चा में सुतले रहय छलहुं त घर के चारु कात मां... दादी.. सभं डगरा पीटैत दरिद्रा के भगाबैत छलिह..


दिवाली के दिन घर-आंगन... दलान के गोबर सं नीपल जाइत छल...पानि सं धोयल जाइत छल... नबका नबका कपड़ा पहिन...पूजा पाठ कयल जाई छल...लक्ष्मी-गणेश जी के पूजा कयल जाइत छल ओकर बाद पटाखा फूलझड़ी छोड़ैत छलहुं...घऱ के चारु कात मट्टी के दिया-बाती...डिबरी जलाबय छलहुं..घर-घर जाक अपना सं बड़ लोक सभक आशीर्वाद लैत छलहुं..मुदा आब ओ सभ धीरे धीरे खत्म भ रहल अछि...आब त लगैत अछि सभ पाइयक खेल भ गेल अछि...रंग-बिरंगा झालड़ सं चमकल घर के आगां डिबरी वाला घर अन्हार में डूबल लागैत अछि...दिवाली सं पहिने आई काल्हि गिफ्ट देबय के परम्परा शुरू भ गेल अछि...मुख्य रूप सं ई ठीकेदार लोकनि के...दफ्तर में काम कराबय वाला के ..नेता अफसर सं काम निकलबाक लेल शुरू कअल गेल छल मुदा आब तं ई दिवाली के सभस प्रमुख परम्परा भ गेल अछि...कम पाई वाला लोक के तं कोनो गुजारे नहि छै...बाजार में सैकड़ों तरहक गिफ्ट के सामान मौजूद छै जे अंधाधुंध कमाई क रहल अछि...गिफ्ट के सामान बेचय वाला के चांदी भ रहल अछि...आं लोक लूटि रहल अछि...दीपावली पर लक्ष्मी जी आयताह कि तड़क भड़क में गरीबक खर्चा बढ़ा जाइत छथिन्ह...ओना मां लक्ष्मी सं इहे प्रार्थना रहत जे हे मां एहि दिवाली सभक घर धन बरसबियौ...सुख...शांति आओर समृद्धि के बरखा करिऔ.

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