29 Aug, 2007

विवश

NARAD:Hindi Blog Aggregator
मैने
आज भी
देखा है
तुम्हारी आंखों
में
प्यार का सागर...
जो
दिल की बातें
कहने को
व्याकुल रहने पर
भी
खामोश थीं
ना जाने
क्या
कारण है
जो
तुम्हें
विवश कर देता
है
कुछ बोलने से
तुम
इसे कैसे
सह सकोगी

आंसू

NARAD:Hindi Blog Aggregator
अभी

तुम गर्व से
हंसकर कहती हो
सभी
तुम्हें देखकर
जीते हैं
गाते हैं
और
मुस्कुराते हैं
पर
मैं चाहता हूं
कि

तुम मुझे देख कर
जीओ
गाओ
और
मुस्कुराओ
और
अगर तुम्हारे

चेहरे पर
मुझे
ये दिखा
तो
मैं
तुम्हे
देखते हुए
मरकर
दिखा दूंगा
तब तुम
अपनी भूल के
कारण
मेरी चिता
पर
आंसू बहाओगी

घायल

वह
चंचल लड़की
मुस्कुराते हुए
मेरे पास
आती...
अपने
नयनों के बाण
से
घायल कर...
मुझे विचलित कर
चली जाती
और मैं
तब तक
तड़पता
जब तक
कि
वह फिर आकर
मेरे
जख्मी दिल पर
अपने प्यार की
मरहम
लगा देती

इजाजत

मैं तो
चाहता था कि
गुलाब की उस
कोमल कली को
सीने से
लगाकर
पूरा खिला दूं
पूर्णता का
एहसास
करा दूं
पूनम का
चांद
बना दूं
पर मुझे क्या
मालूम था कि
माली मुझे
इसकी
इजाजत देगा
और
वो मेरे सीने से
लग पाने के
गम में
बिना खिले ही
दम तोड़ देगी

दिन-रात

दिन
मेरे जीवन को
उजाले से
भर देता
मैं उसको
दूर से ही
जी
भरके देखा करता
सपने बुनता
गाने गाता
हंसता
मुस्कुराता
पर
रात
मेरे जीवन में भी
अंधेरा
ला देती
और
मैं उनको
देखने के लिए
सुबह
की प्रतिक्षा में
रात भर
करवटें
बदलता रहता

प्यार

क्या
प्यार केवल
वही करते हैं
जो प्रेमिका के
मिलने पर
सारी दुनिया को
आग लगाने की
बात करते हैं
या
हम भी
करते हैं
जो
उनके ना
मिलने पर
सीने में
आग का दरिया
लिए
जिये जाते हैं

किसी के साथ

क्या मैं अकेला हूं
नहीं
तो फिर साथ कौन है ?
वे
जो मेरे पड़ोसी हैं
या वे
जो मुझे
पेड़ पर चढ़ा
खुद नीचे
जड़ काट देते हैं
या वे तो नहीं
जो
ये जानने के लिए
अपनी सारी फौज
हमारी कुटिया के पास
इसलिए
लगा रखी है कि
कहीं मैं
किसी के साथ
तो नहीं हूं...

अहांक साथ

अहांक साथ बिताउल दिन
कतेक छोट होयत छल
तखन दुनिया
कतेक नीक लागैत छल.
आमक, लतामक गाछी
गेहुंक, मटरक लहराइत खेत
जतय बितय छल
अपन प्यारक स्वर्णिम क्षण.
अहांक रुसिकय
कुसियारक खेत में छुपि जनाय
हमर बेचैनी अहांक खोजनाय.
मिलला पर ज़ोर हंसिकय भागनाय
दम फुलला पर दुनु गोटा के
कंहा पर हाथ हाफनाय
अहांके भरि पांज चिपैट नाचनाय
, एहिठाम बस मे लोकक चिपटनाय
कतेक फर्क अछि
हम एतय आबि गेलहुं
मुदा हमर मन...हमर हंसि
हमर सभ किछु ओतय रहि गेल
अहिं के पास..
एतय दिन कतेक पैघ लगैत अछि
काटलो नहि कटैत
ओतय खेतक एकांतो मे अहांक संग छल
एतय लाखक भीड़ मे एकसरे
अहां एकरा केना सहैत होएब...

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हितेन्द्र कुमार गुप्ता
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